
कलेक्टर की पहल: ‘ग्रीन होली’ से पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता का संदेश
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुर्णा। होली जैसे पारंपरिक और सांस्कृतिक पर्व को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ ने एक सराहनीय पहल करते हुए नागरिकों से होलिका दहन में पेड़ों की लकड़ी के स्थान पर ‘गोबर की लकड़ी’ (कंडे) का उपयोग करने की अपील की है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी सकारात्मक प्रभाव डालने वाली है।

पर्यावरणीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण पहल
हर वर्ष होलिका दहन के लिए बड़ी मात्रा में पेड़ों की लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिससे हरित आच्छादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से वायु गुणवत्ता, जैव विविधता और जलवायु संतुलन प्रभावित होता है। ऐसे में गोबर की लकड़ी का उपयोग एक वैकल्पिक, प्राकृतिक और सतत समाधान के रूप में सामने आया है।
गोबर से निर्मित लकड़ी के उपयोग से—
पेड़ों की कटाई पर रोक लगेगी।
कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
जैविक अपशिष्ट का सदुपयोग होगा।
होलिका की राख खेतों के लिए प्राकृतिक खाद का कार्य करेगी, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार गोबर के धुएं में कुछ हद तक कीटाणुनाशक गुण पाए जाते हैं, जो वातावरण को शुद्ध करने में सहायक हो सकते हैं।

सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से लाभकारी
यह पहल केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गौशालाओं को भी मजबूती मिलेगी। गोबर की लकड़ी की खरीद से स्थानीय गौशालाओं को आर्थिक सहयोग प्राप्त होगा, जिससे पशुपालन और गौसंवर्धन को प्रोत्साहन मिलेगा।
इसके साथ ही, समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी। त्योहारों को प्रकृति के अनुकूल तरीके से मनाने का संदेश आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बनेगा।
गोबर की लकड़ी कहाँ से प्राप्त करें?
प्रशासन द्वारा नगर पालिका के माध्यम से गोबर की लकड़ी/कंडों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। नागरिक अपने नजदीकी नगर पालिका कार्यालय से संपर्क कर इन्हें प्राप्त कर सकते हैं।
एक कदम प्रकृति की ओर
कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ ने जिलेवासियों से अपील की है कि इस बार होली को केवल रंगों का नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहयोग का पर्व बनाएं। ‘ग्रीन होली’ मनाकर हम न केवल प्रकृति के प्रति अपना दायित्व निभा सकते हैं, बल्कि समाज को एक नई दिशा भी दे सकते हैं।
आइए, इस होली एक संकल्प लें—
पेड़ों की रक्षा करें, प्रकृति से प्रेम करें और सामाजिक सहभागिता के साथ ‘ग्रीन होली’ मनाएं।
